The world I lived is lost in memories . And the memories is now changed to The Lost World ... the world that is lost for the world but the one i Still read and love and read on ...
Saturday, March 28, 2009
Imperfections ...
Thursday, March 26, 2009
My pillar My luck (touchwood)
The building blocks
Friday, March 20, 2009
The Gardener
Saturday, March 7, 2009
The Deserted Water
- Have you told all your friends they look best today , better than they looked yesterday
- Give and Forgive
- Lend a helping hand , not only to those who need , but to all your friends.
- Assure your friends you are always there , and back it up when time comes.
- Never expect them to remember the help you did, its human nature for them to forget, but then a true friend would come back , and realise it later or sooner.
- A small conversation once a week helps to nourish and deep the roots of friendship
- Accept the compliments as well as complaints alike from friends. With mistakes and critism we learn
- Dont think a friend is more special than other , and never ask any in your friends circle to compare your friends. I have been through this worst phase, (though lasted 10 sec ) but i still shrug on the question.
- Say truth , and only truth to all your friends , or people you want to be friends with.
- Lies has no life , broken mirrors hurt more than missing ones.
- Create a alarm , and weekly calender to update them with what u do daily.
- Try to loop them , chat to them ,drop mails , call them conference them , ask friends to update , stay in touch
- TRUST ME .... make people trust you , and never break that. A broken trust is as bad as broken heart only with the difference heart can still be won back.
Sunday, February 22, 2009
कहीं तो होगी ...
Saturday, February 21, 2009
Dil ka khoon
jiske liye mein thi , aur jo tha mere liye .
aaj jab peeth huyo uski taraf, uske mulayam haath panje ban gaye ,
samjha tha zulf suljhayega jo meri kabhi ,
tod di usne zanzeerein wafa ki .
pyaar tha mujhe usse , uski her baat se ,
her ada thi aankho ki tarah uski dilkash ,
teer chala diye dil per mere jitne bhi the ,
jaise bhi the uske tarkash mein.
dil ka khoon laal hota hai ,
wafa ka rang dekha nahi kabhi meine,
per be-wafayi ka bhi laal hota hai ,
beh jaati thi nadiya kabhi uski yaad mein ,
ab yaad nahi usko meri pal bhar bhi.
Waqt kerta shayad wafa , aur sunta meri sada ,
mujhse naraaz tha mera khuda ,
ya ba-khuda meine dil hi laga kkiya kaafir se ,
per agar tu hai hi aye mere khuda is duniya mein ,
to bata de kaafir kaise jeet gaya teri is ibadat per .
mein nahi jaanti ki tu kya kerta hai mere hum nafaz,
per her aayat per meine teri hi padhi hai namaaz,
aur kiye hai sajde tere hi naam ke umar bhar ,
na ja be-hairat ban ker is toote huwe dil से
---------------------------------------
सहारा लिया था मैंने जिसका , जो था साथ मेरे ,
जिसके लिए में थी , और जो था मेरे लिए ,
आज जब पीठ हवी उसकी तरफ़ , उसके मुलायम हाथ पंजे बन गए ,
समझा था जुल्फ सुल्जायेगा जो मेरी कभी ,
तोड़ दी उसने जंजीरें वफ़ा की ।
प्यार था मुझे उससे , उसकी हर बात से ,
हर अदा थी आँखों की तरह उसकी दिलकश ,
तीर चला दिए दिल पर मेरे जितने भी थे ,
जैसे भी थे उसके तरकश में ।
दिल का खून लाल होता है ,
वफ़ा का रंग देखा नही कभी मैंने ,
पर बे-वफाई का भी लाल ही होता है ,
बह जाती थी नदिया कभी उसकी याद में ,
अब याद नही उसको मेरी पल भर भी ।
वक्त करता शायद वफ़ा , और सुनता मेरी सदा ,
मुझसे नाराज़ था मेरा खुदा ,
या बा-खुदा मैंने दिल ही लगा लिया काफिर से ,
पर अगर तू है ही ए खुदा इस दुनिया में ,
तो बता दे काफिर कैसे जीत गया तेरी इस इबादत पर ।
में नही जानती की तू क्या करता है मेरे हम-नाफाज़ ,
पर हेर आयत पर मैंने तेरी ही पढ़ी है नमाज़ ,
और किए है सजदे तेरे ही नाम की उमर भर ,
ना जा बे-गैरत बन केर इस टूटे हुए दिल से ।
कहीं तो होगी ....
Friday, February 20, 2009
फिसलती ज़िन्दगी
तेरा साया जिस में गुजार देते थे पूरा दिन ,
दुपट्टा बन जाता था तेरा साया सर का मेरे ,
और जुल्फ देती थी छाया मेरी छाया को ,
हाथ बन जाते थे प्यार के बंधन ,
आज जब तेज़ धुप में अकेले निकला ,
तो बहुत याद आया ।
याद आया
कम्बल को ज़ोर से लपेट कर सोने की कोशिश की ,
पर मुह से एक नाम निकला और नींद खुली,
किसी ने मेंरे मुह पर पानी छिड़क दिया था ,
पर था नही कोई यह शैतानी की मेरी आँख ने ,
भाई आज रात को आँख खुली तो तू बहुत याद आया ।
कहीं पर दोस्त तेरा साथ था ,
सुबह उठ केर तेरा चेहरा दीखता था ,
रात को सोते समय भी साथ तुम ही थे ,
ज़िन्दगी का हेर पल तेरी दोस्ती के लिए था ,
आज जब ख़ुद को तनहा राह पर देखा ,
तो वोह भाई का हाथ बहुत याद आया ।
करता आया हूँ गलतिया उमर भर से ,
एक दोस्ती तेरे से की थी मैंने कभी ,
सबसे बड़ा काम भी वोह ही था और गलती भी ,
आज जब गिरता हुवा भी गलती नही कर सकता ,
तो भाई तेरा सहारा बड़ा याद आया ।
साथ खाना खाया एक उमर भर ,
और भूखा भी रहा तेरे लिए मेरी जान ,
व्रत तक रखे की जिए तू मेरी भी एक ज़िन्दगी ,
रात उठ उठ के खाना भी बनाया ,
आज जब खाना छोड़ देते है एक वक्त का
भाई तेरा व्रत बड़ा याद आया ।
खेल खेलता था तू तड़प कर साथ मेरे ,
और हरा के रख देता था सबको ऐसे ही ,
और में साथ खड़ा मुस्कुरा देता तेरी जीत पर ,
आज उस खेल में जब में बन गया एक मोहरा ,
दोस्त तेरा खेल बहुत याद आया ।
दौडाते थे सड़क पर बाइक पूरी तेज़ी से ,
किसी से कभी नही हारे उस शहर में कभी कहीं ,
और आपस में हार जीत सोची नही कभी ,
आज जब इस तनहा शहर की दौड़ में अकेले दौड़ा ,
भाई तेरी MP -13 bahut yaad aayi .
ज़मीन से आसमा तक और अपने घर से सामने वाले तक ,
एक पूरी दुनिया एक नज़र में नाप लेते थे ,
एक शहर से दूसरे पलक झपकते होते थे ,
कहीं दिल जीते तो कहीं हड्डिया तोडी ,
फ़िर कहीं पर पलकों पर ख्वाब सजा के आए ,
आज वीराने शहर में तेरी नजरो से दिल जीतना चाहा ,
तो भाई तू बहुत याद आया ।
पूरी पूरी रात निकल जाती थी एक प्याले में ,
कभी रात गुज़री है हमने ठंडी सड़को पर भी,
और कहीं एक किस्से पर दिन गुज़रता था ,
कहीं रोये भी है साथ और बताये है दिल के टुकड़े तुझे ,
आज जब दिल टुकड़े टुकड़े हो गया ,
तो भाई तू बहुत याद आया ।
-------------------
यह पंक्तिया सिर्फ़ उन दो लोगो के लिए है , जो इनमे छुपी एक उमर तलाश सकते है ।
क्यूंकि आज जब तन्हाई में अपनी कमाई देखता हूँ ,
तू सिर्फ़ दोस्त ही नज़र आते है ।
Wednesday, February 18, 2009
खौफ्फ़ लगता है ...
और नही डरते तो दोस्ती की इबादत करो ,
एक उमर बाद मिले कुछ दोस्त जो थे दोस्त से बढ़कर ,
जो रहते थे घर में कम और दिल में ज़्यादा ,
जिनके साथ पी मैंने सुबह की चाय और रात की हस्सी ,
जो न थे मेरे रिश्तेदार , ना मेरे हमदम ,
पर बन गए जो मेरे दिल की धड़कन ...
आज एक उमर गुज़र सी गई है ,
और याद नही जाती उनकी जो थे करीब दिल के ,
किसी के चेहरे की रौनक याद है , किसी की प्यारी हस्सी ,
और कोई थी ही इतनी हसीं की हसीना लगती थी ,
कोई इतनी समझ्धार की सबको लेकर चले साथ ,
तो किसी में बचपना भरा हुवा ,
कहीं तेज़ हवा का झोंका था , तो कोई मस्त मौला था ,
कोई चीनी की तरह घुल गया दोस्ती में ,
और कहीं कोई पिट भी गया प्यार में ,
कुछ तो शादी केर के निकल लिए ,
तो किसी ने तलाश लिया जीवन साथी ,
कहीं पर कोई गाना किसी की याद दिला देता है ,
तो कहीं सिनेमा का साथ है ...
पर जो बात इनमे में है वोह है नही कहीं ,
वोह रात को २ बजे चाय बनाना ,
भाई में बनाता हूँ तुम बैठो ,
और छोड़ आएगा दीपक सुबह ७ बजे ,
वोह अँगरेज़ देख के सलीम फेंकू को याद करना ,
तो कहीं अपने सैफ का स्टाइल ,
वोह न फ स के लंबे सफर ,
नही भूलती है मुझे सुबह ४ बजे की गपशप ,
न भूलती है सुबह ६ बजे खाना हल्का फुल्का खाना ,
और न ही भूलती है वोह डरावनी रात का बाना ,
तो याद है दीपक जी के घर का हवन ,
कहीं कुछ नही भूला है यह लड़का ,
जाने तू या जाने ना देखकर आया था साथ तेरे ,
और आज तक तू साथ है मेरे ,
चाहे जाने तू या जाने ना ,
कहीं ऐसा न हो की में भूल जाऊँ ,
वोह लम्बी लम्बी ई-मेल के सिलसिले ,
वोह पेट्रोल पम्प के किस्से ,
वोह सी सी दी की काफ़ी ,
और टर्मिनल की चाय ,
कहीं भूल न जाऊँ में ,
वोह लम्बी बातें , वोह लंबे सफर ,
वोह उमर से ज़्यादा घेहरी यादें ,
वोह मुझ से ज़्यादा में ....
खौफ्फ़ लगता है की कहीं भूल न जाऊँ में ,
कहीं भूल न जाए तू ...
कहीं हम भूल न जाए एक दूसरे को ...
डर लगता है दोस्त मेरे ....
Thursday, February 12, 2009
ढलता दिन और तेरी याद ....
डरते हैं नाम लेने से उसका की कहीं नज़र न लगे उससे ,
चाय का सहारा था वोह मेरी जब भी पीने बुलाती थी ,
काम छोड़ के उसके पास पहुंच जाता था जिसकी याद आती है ...
दिन ढलता है आज भी , और आज भी शाम होती है ,
चाय भी बनती है दोस्त भी मिलते है ,
पर वोह हसी , वोह काम में फसी ,
वोह मीठी सी मुस्कराहट लिए सामने बैठी एक परी ,
अब नही मिलती चाय के साथ शाम के बाद ...
दिन ढल रहा है , और हो रहा है वक्त पीने का ,
मचल रहा है दिल फ़िर उससे मिलने को ,
फ़िर से उमर रही है दिल में तरंगे उसके ख्याल से ,
जी उठा हूँ फ़िर में तेरे एहसास aसे ,
पूछते है मुस्कुरा के मेरे दोस्त यह अक्सर ,
क्यूँ मुस्कुरा जाता है प्याली को देखकर ,
एक प्याले चाय में जो है तेरी तस्वीर छुपी ,
पर शायद नही समझेंगे तेरे अक्स को जिसमे मेरी जान है बसी ....
शाम ढल रही है और हो रहा hai वक्त ,
अब न जाने तुझे में याद भी हूँ की नही ,
अभी भी वोह ५:२२ से ५:५३५ से बीच का घंटा याद है ,
और ६ बजे टर्मिनल पर चाय का कौपौन लेकर रखना ,
वोह तेरी दही पूरी भी याद है और चाय के दो तीन दौरे भी ...
और याद है मुझे वोह तेरा चाँद लम्हों पहेले आ जाना ,
फ़िर जल्दी में चाय पी केर बस के लिए जाना ....
लंबा वक्त हो गया शायद , पर किसी ने कुछ बताया नही ,
उमर गुज़र गई पर लगता है रूह वहीँ जम गई ,
उस्सी शाम की चाय ने केर दिया बेबस आज हमने इतना ,
की चाय का प्याला होठो तक आता तो है ,
पुराने लम्हे याद दिलाता तो है , पर नही होता नशा चाय में ,
नही होता नशा अब चाय में चाय का ,
यादो ने बेचारी चाय का वोह हक भी चीन लिया ...
याद तो हेर प्याले में हम आयेंगे ही ,
रूह छोड़ के आए है हम उन्ही वीरानो में अपनी ,
भटकी है जहाँ चाय की तलाश में दोस्त मेरी ,
मिलती है आज भी शानदार चाय उसको वहीँ पर ,
और एहसास रहता होगा कहीं पर ,
पलट के देखना ए दोस्त कभी ,
हम भी उस्सी प्याले में मुस्कुराते मिलेंगे .....
Saturday, February 7, 2009
Accept me as I am
I have no guarantee.
A claim to perfection I have not.
Perfect I cannot be.
I, like you.....am human.
Prone to make mistakes.
Failure is not a character flaw,
Just a part of the human makeup.
I live, I laugh and I also learn.
My knowledge is incomplete.
I am searching all the time,
in waking hours as well as sleep.
I have a long road to travel,
as well as you do.
We learn our lessons on the way.
Wisdom we shall acrue.
Accept me as I am
Because I am ....me.
And You are you.
No one like me in the world.
That is my only guarantee.
God Bless ....
PS: For those who still have not accepted me ... accept me as i am , else i will change for u ... ... do comment if u like this crap above
Thursday, January 15, 2009
Mornin i opened my eyes ...
..i could feel ur love around..
this morning when i looked up to the sky
.. i could see u in the clouds..
this morning when the breeze touched my cheeks
..i could feel ur kiss..
this morning when the wind embraced me
.. i could feel ur bliss..
this morning when my eyes were wet
.. i could feel the pain u had..
this morning when i smiled
..i could feel u being so happy n mad..
this morning when i missed you
.. i could feel that you care..
this morning when i wanted to luv u
...i wish you could be here..
(this is written by Ashu )